बाबूलाल बोले दिल से, बीजेपी फिर से,17 को गले लग जाएंगे

बाबूलाल बोले दिल से, बीजेपी फिर से,17 को गले लग जाएंगे
Publicbol (File Photo)
पीबी ब्यूरो ,   Feb 11, 2020

झारखंड के पहले मुख्यमंत्री और जेवीएम के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने आज अपनी पार्टी के बीजेपी में विलय की घोषणा की. इसके साथ ही तमाम अटकलों का दौर खत्म हुआ.

इसके साथ ही सबकी निगाहें इस ओर टिकी है कि बीजेपी में बाबूलाल मरांडी की हैसियत क्या होगी. दरअसल बीजेपी बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष बनाएगी, या प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देगी, इसे लेकर दोनों दलों में हलचल है.

हालांकि बाबूलाल किसी पद पर रहें, बीजेपी में उनके जाने भर से झारखंड की सियासत करवट लेगी, इसके संकेत साफ हैं. इस बीच बीजेपी ने बाबूलाल के फैसले का स्वागत किया है. 

इससे पहले आज रांची में झारखंड विकास मोर्चा केंद्रीय कार्यकारिणी की हुई बैठक में बीजेपी में विलय को लेकर प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया. 

इसके बाद बाबूलाल मरांडी ने प्रेस कांफ्रेस कर जानकारी दी कि 17 फरवरी को रांची में बीजेपी ने कार्यक्रम रखा है. उस कार्यक्रम में हमलोग बीजेपी में शामिल होंगे और नई पारी की शुरुआत करेंगे.

इसे भी पढ़ें: दिल्ली में आप विधायक के काफिले पर फायरिंग, एक पार्टी कार्यकर्ता की मौत

इस कार्यक्रम में जेवीएम के पंचायत स्तर तक के कार्यकर्ता, समर्थक शामिल होंगे. उन्होंने कहा, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह समेत बीजेपी के कई बड़े नेता कार्यक्रम में शामिल होंगे. हम बीजेपी के सभी सांसदों और विधायकों से भी अनुरोध करेंगे कि उस कार्यक्रम में मौजूद रहें. 

इसे भी पढ़ें: राजनीतिक रूप से बीजेपी और बाबूलाल मरांडी का डीएनए एक ही हैः रवींद्र राय

बीजेपी में आपकी हैसियत क्या होगी, इस सवाल पर बाबूलाल मरांडी ने कहा, ''पद को लेकर अभी कोई बात नहीं है. हमें काम करना है. झाड़ू लगाने का काम भी हम कर सकते हैं. बीजेपी से अलग होकर अपना घर बनाया था. कहीं गए नहीं थे. फिर अपने घर में ही जा रहे हैं.''

इससे पहले गहमागहमी के बीच बाबूलाल मरांडी ने पार्टी की केंद्रीय कार्यकारिणी को संबोधित भी किया. बाबूलाल मरांडी के फैसले पर सभी ने हाथ उठाकर समर्थन किया. 

हालांकि बैठक में मौजूद पदाधिकारी और सदस्य पहले से तैयार थे कि आज बीजेपी में विलय को लेकर प्रस्ताव पारित किया जाना है. 

2006 में छोड़ दी थी पार्टी

बाबूलाल मरांडी ने 2006 में बीजेपी छोड़ दी थी. इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाई. 14 साल बाद वे फिर से बीजेपी में लौट रहे हैं. इन 14 सालों में उन्होंने काफी उतार- चढ़ाव का सामना किया.

कह सकते हैं झारखंड की सियासत में एक लंबी राजनीतिक कहानी बनकर वे उभरे.  

लोकसभा और विधानसभा के चुनाव लड़े. और दमदारी के साथ बीजेपी तथा उसकी सरकारों का विरोध करते रहे. इन सालों में बीजेपी विरोधी कई दलों के नेताओं के साथ उनका दोस्ताना संबंध बना रहा. 

गौरतलब है कि 2014 के विधानसभा चुनाव में जेवीएम में एक नारा काफी जोर से उछाला गया था- ''कहो दिल से बाबूलाल फिर से''. दरअसल जेवीएम सत्ता में अपने बूते आना चाहता था.

इसे भी पढ़ेः बीजेपी चाहती है वापस हो जाऊं, पर अभी तय नहीं किया हैः बाबूलाल

इसे भी पढ़ें: शाहीन बाग पर सु्प्रीम कोर्ट ने कहा, रास्ता नहीं रोक सकते, हर कोई ऐसा करने लगे तो क्या होगा?

मरांडी गठबंधन में जाने के बजाय अकेले चुनाव लड़े. नतीजे आए, तो वे सत्ता से दूर ही रहे. बाबूलाल खुद दो सीटों पर चुनाव हार गए. हालांकि उनकी पार्टी से आठ लोग चुनाव जीते. 

आठ विधायकों में से छह बीजेपी में शामिल हो गए. जाहिर है उन्हें सेटबैक का सामना करना पड़ा.

बाबूलाल उनके खिलाफ स्पीकर के कोर्ट में गए और लगभग पांच साल तक दलबदल का मामला लड़ते रहे.

बीते साल फैसला उन छह विधायकों के समर्थन में ही दिया गया. 

इसके बाद 2019 के चुनाव में बाबूलाल मरांडी ने अपने दम पर राज्य की सभी 81 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार उतारे. 

इनमें तीन पर ही जीत हासिल हुई, बाबूलाल मरांडी राजधनबार से प्रदीप यादव पोड़ैयाहाट से और बंधु तिर्की मांडर से चुनाव जीते.

चुनाव नतीजे आने के बाद जेवीएम ने हेमंत सोरेन की सरकार को समर्थन दिया. 

बनते- बिगड़ते समीकरण

इस बीच जेवीएम के अंदर- बाहर की राजनीति में तेजी से समीकरण बनने- बिगड़ने लगे. बाबूलाल मरांडी की बीजेपी से नजदीकी बढ़ती रही. उधर पार्टी के दो विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की कांग्रेस के करीब होने लगे. 

इधर विधानसभा चुनाव में बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा और वह सत्ता से बाहर हो गई. इस बार बीजेपी को 25 सीटों पर ही जीत मिली है. जबकि 2014 में वह 37 सीटों पर जीती थी.

जेवीएम के छह विधायकों के शामिल होने के बाद बीजेपी में विधायकों की संख्या 43 हो गई. 

विधानसभा चुनाव के वक्त जेएमएम और कांग्रेस से तीन विधायक बीजेपी में अलग शामिल हुए. 

उल्लेख प्रासंगिक होगा कि बीजेपी बहुत पहले से बाबूलाल की वापसी की कोशिश करती रही है.

इस बार राज्य में आदिवासियों के लिए सुरक्षित 28 में से 26 सीटों पर बीजेपी की हार के बाद पार्टी के शीर्ष नेता और रणनीतिकारों की नजर नए सिरे से बाबूलाल मरांडी की ओर जाती रही. 

इसे भी पढ़ें: जेवीएम ने हेमंत सरकार से समर्थन वापस लिया, प्रदीप यादव को विधायक दल के नेता पद से हटाया

इधर 14 साल तक बीजेपी को तवज्जो नहीं देते रहे बाबूलाल ने भी परिस्थितियों को भांपते हुए हाथ बढ़ाना बेहतर समझा.  बाबूलाल मरांडी की लगातार शीर्ष नेताओं से बातें हो रही.

पार्टी के विलय को लेकर और दसवीं अनुसूचि के तहत दलबदल की बाध्यता से बचने की खातिर ही जेवीएम की नई कार्यकारिणी का गठन हुआ. हालांकि यह कहा नहीं गया. 

पार्टी के दो विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को दल से निकाल दिया गया है. बाबूलाल मरांडी ने कहा भी है कि दोनों को आजाद कर दिया गया है. वे कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र हैं.  

इस दौरान लगभग 50 दिनों तक संभावनाएं बल खाती रही कि बाबूलाल बीजेपी में विलय के लिए आगे लगातार आगे बढ़ रहे हैं.

हालांकि 50 दिनों के दौरान बाबूलाल ने कभी सार्वजनिक तौर पर खुलासा नहीं किया कि वे बीजेपी में लौट रहे हैं. लेकिन पार्टी की गतिविधियां इस ओर इशारा करती रही.  

अटकलों और कयासों के बीच आज कार्यकारिणी की बैठक में विलय संबंधित प्रस्ताव पारित किया गया. 

तारीखों मे बदलती कहानी

23 दिसंबर 2019 

झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद बाबूलाल मरांडी ने यह भांप लिया था कि उन्हें विपक्ष में बैठना होगा. पार्टी के तीन ही लोग चुनाव जीते. उधर जेएमएम-कांग्रेस-राजद गठबंधन को 47 सीटों पर जीत हासिल हुई. बाबूलाल मरांडी अपने दो विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की की राय जानना चाहते थे. 

24 दिसंबर 2019

जेवीएम के तीनों विधायकों की भी रांची पार्टी कार्यालय में बैठक हुई और सरकार को समर्थन देने का निर्णय लिया गया.  इस बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष और गठबंधन की सरकार का नेतृत्व करने वाले हेमंत सोरेन ने अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी से मुलाकात की और सरकार गठन पर बातचीत की. बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन की सरकार को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की. इस बाबत एक पत्र भी हेमंत सोरेन को दिया गया.

हेमंत ने क्या कुछ कहा

बाबूलाल से मुलाकात के दौरान हेमंत सोरेन ने मीडिया से बातचीत में कहा, ''हमलोग चुनाव अलग- अलग लड़े, पर लक्ष्य एक ही था. तत्कालीन शासन (बीजेपी की सरकार) में राज्य की जो स्थिति बनाई गई है उसमें सुधार के लिए सभी लोगों की मदद जरूरी होगी. बाबूलाल मरांडी वरिष्ठ नेता हैं. सदन चलाने के अनुभवी हैं. राज्य को विकास के रास्ते पर ले जाने में उनका नजरिया भी अहम होगा. हम चाहते हैं कि बाबूलाल मरांडी की भी सहयोग मिले''.

5 जनवरी 2020  

चुनाव नतीजों पर समीक्षा के बाद जेवीएम की कार्यकारिणी भंग. पार्टी को लेकर सभी अधिकार बाबूलाल के पास. अटकलों का दौर शुरू कि बीजेपी में जाने की राह तलाशी जा रही है. विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की ने कहा कि कार्यकारिणी भंग किए जाने का संकेत है कि बाबूलाल मरांडी के मन में कुछ चल रहा है.  

इसे भी पढ़ें- कया है दसवीं अनुसूचि और बाबूलाल के लिए क्या होगी बाध्यता

6 जनवरी 2020

विधायक बंधु तिर्की ने प्रेस कांफ्रेस कर कहा कि बाबूलाल मरांडी बीजेपी में शामिल होने की गलती नहीं करेंगे. इसके साथ ही बंधु तिर्की ने कहा है कि फिलहाल यह परिस्थिति नहीं है कि हमें कांग्रेस में जाना पड़े. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं से बातचीत होते रहती है. इसका यह मतलब नहीं कि वे कांग्रेस में जा रहे हैं. वैसे भी जेवीएम ने गठबंधन को समर्थन दिया है. पार्टी के दोनों विधायक बाबूलाल मरांडी के साथ हैं. 

16 जनवरी 2020

कार्यकारिणी भंग किए जाने के बाद बाबूलाल मरांडी विदेश दौरे पर चले गए. इधर नई कार्यकारिणी के गठन का खाका तैयार किया जाता रहा. इसकी जिम्मेदारी बाबूलाल मरांडी अभय सिंह, विनोद शर्मा सरीखे लोगों को दे रखी थी. हालांकि इसका खुलासा नहीं किया जा रहा था. 

16 जनवरी को बाबूलाल मरांडी विदेश से वापस लौटे. मीडया के द्वारा बीजेपी में जाने से जुड़े सवालों पर कहा था कि बीजेपी चाहती है कि वापस हो जाएं, लेकिन हमने यह अभी तय नहीं किया है. 

बाबूलाल मरांडी ने यह भी कहा, ''यह पहली दफा नहीं है. बीजेपी का सतत प्रयास है. चुनाव समाप्त के बाद भी पहल हुई है. पर हमने अपनी ओर से तय नहीं किया है. हमारे साथ पूरी पार्टी है. इस तरह का कोई काम नहीं करना चाहते, जिससे हमारे कार्यकर्ता को तकलीफ हो. 

17 जनवरी 2020

बीजेपी में बाबूलाल मरांडी के शामिल होने और उनकी पार्टी के विलय की अटकलों के बीच जेवीएम ने नई कार्यसमिति की घोषणा की. बाबूलाल मरांडी की अध्यक्षता वाली कार्यसमिति में 151 लोगों को शामिल किया गया. अभय कुमार सिंह को पार्टी का प्रधान महासचिव बनाया गया है.

इससे पहले विधायक प्रदीप यादव इस पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. इसके साथ ही पिछली कार्यकारिणी में केंद्रीय महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे बंधु तिर्की को कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया है. 

18 जनवरी 2020

पार्टी में बनते-बिगड़ते समीकरणों के बीच विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की ने जेवीएम प्रमुख से मिलकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी और बताया कि हम दोनों बीजेपी मे जाने के लिए सहमत नहीं हो सकते, बाकी आपकी मर्जी.

19 जनवरी 2020

विधायक बंधु तिर्की को भेजा गया स्पष्टीकरण और 48 घंटे में मांगा गया जवाब. बंधु पर आरोप था कि विधानसभा चुनाव में उन्होंने हटिया से पार्टी उम्मीदवार शोभा यादव के समर्थन में प्रचार नहीं कर कांग्रेस उम्मीदवार का साथ दिया. 

21 जनवरी 2020

बंधु तिर्की को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए दल से निकाला गया. जेवीएम के प्रधान महाससचिव अभय सिंह ने बताया था कि उन्होंने स्पष्टीकरण का जवाब नहीं दिया. इस कार्रवाई पर बंधु तिर्की ने बाबूलाल का शुक्रिया किया जबकि  प्रदीप यादव ने कहा है कि इतनी जल्दी क्या थी कि बंधु तिर्की को पार्टी से निष्काषित कर दिया गया. इससे पहले पार्टी विधायक बंधु तिर्की पर हटिया क्षेत्र से अधिकृत उम्मीदवार शोभा यादव ने आरोप  लगाया था कि उन्होंने उनके खिलाफ चुनाव प्रचार किया.

23 जनवरी 2020

झारखंड विकास मोर्चा में बनते- बिगड़ते समीकरणों के विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की ने दिल्ली में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की. इस मौके पर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल और झारखंड कांग्रेस के प्रभारी आरपीएन सिंह मौजूद थे. जाहिर है इस मुलाकात के मायने निकाले जाने लगे. 

24 जनवरी 2020

झारखंड विकास मोर्चा ने हेमंत सरकार से समर्थव वापस ले लिया है. इसके साथ ही प्रदीप यादव को विधायक दल के नेता पद से हटाया गया.  बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन और विधानसभा अध्यक्ष को अलग- अलग पत्र भेजा. हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में समर्थव वापस लेने की वजह भी बताई है. जेवीएम प्रमुख ने कहा कि यूपीए गठबंधन की कांग्रेस पार्टी दल के विधायकों को तोड़ कर अपने दल में शामिल करने की कोशिश कर रही है.

इसे भी पढ़ें: विधायक प्रदीप यादव ने खोला मोर्चा, बोले, ओछी राजनीतिक हरकत पर उतर आए हैं बाबूलाल

4 फरवरी 2020 

चार फरवरी को विधायक प्रदीप यादव को शोकॉज भेजा गया था. प्रदीप यादव पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने, बिना इजाजत सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मिलने और सीएए के विरोध में जुलूस में शामिल होने के आरोपों पर उनसे 48 घंटे में जवाब देने को कहा गया. प्रदीप यादव ने कहा कि उन्हें कोई पत्र नहीं मिला है. 

6 फरवरी 2020

स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने पर प्रदीप यादव को भी दल से निकाला गया. हालांकि इस कार्रवाई का अंदेशा शोकॉज के साथ ही सामने आ गया था. दल से बाहर किए जाने के बादद प्रदीप यादव ने बाबूलाल मरांडी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. इसके बाद मरांडी के बचाव में दल के प्रधान महासचिव अभय सिंह सामने आए. 

लोकसभा का चुनाव गठबंधन में

2019 का लोकसभा चुनाव बाबूलाल मरांडी विपक्षी दलों- कांग्रेस, जेएमएम राजद के साथ मिलकर लड़े थे. विपक्षी दलों ने जेवीएम के लिए दो सीटें छोड़ी थी.

बाबूलाल मरांडी कोडरमा से लड़े जबकि प्रदीप यादव को गोड्डा में लड़ाया गया. हालांकि दोनों सीटों पर जेवीएम की हार हुई. लोकसभा चुनाव के बाद बाबूलाल विधानसभा चुनाव की तैयारी में अकेले लड़ने के लिए आगे बढ़े. लेकिन यहां भी परिणाम आशातीत नहीं रहा. 

उससे पहले 2014 का लोकसभा चुनाव भी बाबूलाल मरांडी अकेले लड़े. लेकिन पार्टी का कोई उम्मीदवार नहीं जीता. खुद बाबूूलाल भी कोडरमा से हार गए.

जमी बर्फ 14 सालों में पिघली

2004 के लोसभा चुनाव में बाबूलाल मरांडी झारखंड में बीजेपी से अकेले जीतने वाले उम्मीदवार थे. कोड़रमा से चुनाव जीतकर उन्होंने बीजेपी की लाज बचाई थी. जबकि तेरह सीटों पर यूपीए के उम्मीदवार जीते थे.

इस बीच बाबूलाल मरांडी बीजेपी में असहज महसूस करते रहे. दरअसल 2003 में सहयोगी दलों के द्वारा मुख्यमंत्री पद से हटाये जाने के बाद से ही वे बीजेपी के रुख से खुश नहीं थे. 

2006 में बाबूलाल मरांडी ने बीजेपी छोड़ दी. और झारखंड विकास मोर्चा का गठन किया. उन्होंने कोडरमा संसदीय क्षेत्र से इस्तीफा दे दिया.

इसके बाद 2007 में कोडरमा से निर्दलीय लोकसभा का उपचुनाव वे जीत गए. बीजेपी को उन्होंने शिकस्त दी. इसके बाद फिर 2009 का चुनाव बाबूलाल मरांडी कोडरमा से ही जीते. उन्होंने फिर बीजेपी को हराया. 

लेकिन 2014 के चुनावों में बाबूलाल मरांडी को कई हार का सामना करना पड़ा. विधानसभा चुनाव में वो एक साथ दो सीटों से हार गए. . 

बीजेपी में इसे कोड़रमा में 2006 और 2009 के चुनावों में हार का बदला के तौर पर भी देखा गया.

हालांकि बाबूलाल के बीजेपी में पुनः शामिल होने या पार्टी के मर्जर को लेकर जब- तब अटकले लगती रही. कहा- सुना यह भी  जाता है कि बीजेपी के कई शीर्ष नेताओं ने उन्हें मनाने का प्रयास किया. लेकिन वे डिगे नहीं.

वक्त के साथ जमी बर्फ पिघलती रही. और वह 14 सालों पर वह दिन भी आया जब बाबूलाल ने घोषणा कर दी कि वे अपने पुराने घर लौट रहे हैं.  

 

 

 


(आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

लोकप्रिय

लाल किले से पीएम मोदी के भाषण की ये 10 बड़ी और अहम बातें जानिए
लाल किले से पीएम मोदी के भाषण की ये 10 बड़ी और अहम बातें जानिए
आईपीएल 2020 के रंग में धौनी, साथियों के साथ चेन्नई पहुंचे
आईपीएल 2020 के रंग में धौनी, साथियों के साथ चेन्नई पहुंचे
शहरी क्षेत्रो में 'सीएम श्रमिक योजना', हेमंत बोले, निबंधन के 15 दिनों में रोजगार अन्यथा बेरोजगारी भत्ता
शहरी क्षेत्रो में 'सीएम श्रमिक योजना', हेमंत बोले, निबंधन के 15 दिनों में रोजगार अन्यथा बेरोजगारी भत्ता
वैक्सीन पर उठते सवालों के बीच रूस का दावा, दो सालों तक छू नहीं सकेगा वायरस
वैक्सीन पर उठते सवालों के बीच रूस का दावा, दो सालों तक छू नहीं सकेगा वायरस
राजस्थान विधानसभा में बोले सचिन पायलट, मैं जब तक बैठा हूं, सरकार सुरक्षित है
राजस्थान विधानसभा में बोले सचिन पायलट, मैं जब तक बैठा हूं, सरकार सुरक्षित है
वकील प्रशांत भूषण अवमानना के मामले में दोषी करार, सजा पर सुनवाई 20 अगस्त को
वकील प्रशांत भूषण अवमानना के मामले में दोषी करार, सजा पर सुनवाई 20 अगस्त को
हेमंत बोले, झारखंड की स्थानीय नीति सवालों के घेरे में, हम देख रहे हैं कि क्या बदलाव किया जाए
हेमंत बोले, झारखंड की स्थानीय नीति सवालों के घेरे में, हम देख रहे हैं कि क्या बदलाव किया जाए
तेजस्वी ने नीतीश और उनके मंत्री को घेरा, कोरोना के आंकड़ों पर पूछा- कौन सच्चा कौन झूठा?
तेजस्वी ने नीतीश और उनके मंत्री को घेरा, कोरोना के आंकड़ों पर पूछा- कौन सच्चा कौन झूठा?
झारखंडः पीटीआई के ब्यूरो चीफ पीवी रामानुजम ने खुदकुशी कर ली
झारखंडः पीटीआई के ब्यूरो चीफ पीवी रामानुजम ने खुदकुशी कर ली
 जीडीपी में गिरावट की नारायणमूर्ति की आंशका पर राहुल का तंज: ‘मोदी है तो मुमकिन है’
जीडीपी में गिरावट की नारायणमूर्ति की आंशका पर राहुल का तंज: ‘मोदी है तो मुमकिन है’

Stay Connected

Facebook Google twitter