एनपीआऱ के खिलाफ राजभवन के सामने सभा, उठी मांग, हेमंत सरकार झारखंड में इसे खारिज करे

एनपीआऱ के खिलाफ राजभवन के सामने सभा, उठी मांग, हेमंत सरकार झारखंड में इसे खारिज करे
Photo- Siraj Dutta (पूर्व आईएएस कन्नन गोपीनाथन सभा में बोलते)
पीबी ब्यूरो ,   Mar 05, 2020

झारखंड जनाधिकार महासभा के बैनर तले आज राजधानी रांची में हजारों लोग एनपीए के खिलाफ जुटे. सभा की गई. और मांग उठी कि झारखंड में एनपीआर को हेमंत सरकार खारिज करे.

सभा में विभिन्न जन संगठनों से जुड़े प्रतिनिधि के अलावा अलग- अलग समुदायों से हजारों लोग जुटे. 

जबकि रांची के कडरू में एनआरसी तथा सीएए के खिलाफ कई दिनों से आंदोलन कर रही मुस्लिम महिलाएं भी राजभवन पहुंची.   

धरने को पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने भी संबोधित किया. लोकतंत्र पर बढ़ते हमलों के आधार पर पिछले साल गोपीथन ने सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया था.

गोपीनाथन ने कहा, "यह हिंदू-मुसलामान मुद्दा नहीं है. यह कानून गरीब-विरोधी, महिला-विरोधी, आदिवासी-विरोधी है, जो दस्तावेजों का उत्पादन नहीं कर सकते .एनपीआर का सबसे बड़ा खतरा यह है कि एक ब्लॉक में एक बाबू किसी को भी एक 'संदिग्ध नागरिक' टैग कर सकता है. एनपीआर के बदले हमें बेरोजगारी के बारे में सवाल पूछने की ज़रूरत है.”

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गोपानाथन के अलावा भाकपा माले के विधायक विनोद सिंह ने भी एनपीआर को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा किया. उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार को इस मसले पर अरना नजरिया स्पष्ट करना चाहिए. 

झारखंड में एक अप्रैल से एनपीआर की प्रक्रिया शुरू होने वाली है. इसके लिए सरकारी स्तर पर प्रशिक्षण का कार्यक्रम चल रहा है. 

जेम्स हेरेंज ने इस आयोजन का परिचय देते हुए कहा, “कई राज्य सरकारें एनआरसी का विरोध कर रही हैं और कुछ ने केंद्र सरकार से सीएए को निरस्त करने की अपील की है. केरल और पश्चिम बंगाल ने स्पष्ट रूप से सभी एनपीआर गतिविधियों को रोकने के लिए एक आदेश जारी किया है। झारखंड सर्कार को ऐसा करने से क्या रोक रहा है? ” 

धरने को कुमार चंद मार्डी, प्रफुल्ल लिंडा, सरसराज, ज्यां द्रेज, धरमदास वाल्मीकि, दयामनी बारला, सोलोमन, इबरार अहमद, अलोका कुजूर, वासवी किरो, सिफवा, सुनील मिंज, पीसी मुर्मू, नरेन कुमार भुइयां, प्रेमसाई मुंडा ने भी संबोधित किया. और इस बात पर जोर दिया कि हेमंत सोरेन की सरकार एनपीआऱ को खारिज करे. 

इससे पहले इबरार अहमद ने कहा,“एक नया मुस्लिम लीडरशिप महिलाओं का, युवाओं का आया है, जो धर्म आधारित राजनीति नहीं, बल्कि ज़रूरी मुद्दों की बात करता है.

पी पी वर्मा ने कहा,“ये मुस्लिम मूवमेंट नहीं है. ये दलितों का, आदिवासियों का, ग्रामीणों का, गरीबों का आंदोलन है. एनपीआऱ का वार सभी पर है.''

सभा में गीत और कविताएं भी प्रस्तुत की गई. जबकि महिलाओं और बच्चों ने नारेबाजी की. 

धरना का एक और आकर्षण जाने-माने कवि आमिर अज़ीज़ का प्रदर्शन था, जिसमे "सब याद किया जाए" कविता भी शामिल थी. यह शक्तिशाली कविता है जो हाल ही में वायरल हुई है.


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