18 दिन बीते, हेमंत सरकार में कौन बनेगा मंत्री, पेंच इतने कि पत्ते नहीं खोल रहे

18 दिन बीते, हेमंत सरकार में कौन बनेगा मंत्री, पेंच इतने कि पत्ते नहीं खोल रहे
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पीबी ब्यूरो ,   Jan 16, 2020

बहमुत के लिए पूर्ण और मजबूत आंकड़ा रहने के बाद भी झारखंड में हेमंत सोरेन कैबिनेट का विस्तार बाकी है. मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दिल्ली में कांग्रेस नेताओं के साथ मगजमारी कर हेमंत सोरेन झारखंड लौटे हैं, पर फिलहाल यह तस्वीर साफ नहीं हो सकी है कि किन्हें कैबिनेट में शामिल कराए जा रहा है और कब तक. 

जबकि हेमंत सोरेन समेत तीन मंत्रियों के शपथ लिए 19 दिन होने को हैं, मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो सका है. जबकि गठबंधन के पास 47 सदस्यों के साथ पूर्ण बहुमत है. जेवीएम के तीन विधायकों ने बिना शर्त समर्थन दे रखा है.  

बुधवार की शाम हेमंत सोरेन ने मीडिया से कहा कि जल्दी ही यह काम हो जाएगा. जबकि कांग्रेस के मंत्री रामेश्वर उरांव का कहना है कि बीस जनवरी तक मंत्रिमंडल का विस्तार हो जाएगा. बातचीत चल रही है. और कोई जिच नहीं है. 

लेकिन कांग्रेस- जेएमएम के अंदरखाने जो खुसर- पुसर है, उस मतबिक सब कुछ ठीक नहीं है. कांग्रेस की दावेदारी को लेकर हेमंत सोरेन दबाव में हैं और जेएमएम से किन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए, इसे लेकर भी नामों का चयन बहुत आसान नहीं हो रहा.  

इस बीच कल कांग्रेस के सभी विधायकों की पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से दिल्ली में मुलाकात तय है. वैसे भी मंत्री पद के लिए लॉबिंग को लेकर कांग्रेस के कई विधायक लगातार दिल्ली में ही शीर्ष नेताओं की परिक्रमा करते रहे हैं. 

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कैबिनेट में 11 मंत्री होंगे

हेमंत सोरेन ने 29 दिसंबर को झारखंड में सत्ता की बागडोर संभाली है. उनके साथ कांग्रेस के दो और राजद कोटा से एक मंत्री ने शपथ ली है. मंत्रिमंडल में अधिकतम 11 मंत्री शामिल हो सकते हैं. राजद ने एक सीट पर ही चुनाव जीता है. उसे सरकार में हिस्सेदारी मिल गई है.

अब 10 में ही जेएमएम और कांग्रेस के बीच बंटवारा होना है. जबकि कांग्रेस की नजर भी पांच मंत्री बनाने पर है. कांग्रेस पांच से कम पर भी आए, तो उसके कोटा से चार मंत्री बनना तय है. 

विधानसभा अध्यक्ष का पद जेएमएम के कोटा में गया है. लिहाजा कांग्रेस की नजर पांच मंत्री पद पर है. जेएमएम के सामने दिक्कत यह है कि कांग्रेस को पांच देने से उसके हिस्से पांच मंत्री ही आएंगे. जबकि पार्टी में मंत्री बनने के लिए दर्जन भर दिग्गजों ने पहले ही दावेदारी कर रखी है. 

हालांकि जेएमएम से किसी विधायक ने खुलकर अपनी मांग नहीं रखी है और न ही यह अहसास होने दे रहे हैं कि हेमंत सोरेन पर उनका कोऊ दबाव है. सभी वक्त के इंतजार में हैं. इस बीच शिबू सोरेन ने कहा है कि हेमंत सोरेन परिपक्व हैं और वे इस मामले को सुलझा लेंगे. 

भारी भरकम विभाग

दिल्ली में मंत्री पद और विभागों को लेकर हेमंत सोरेन की कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल तथा झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह से इस मुतल्लिक लंबा विमर्श हुआ है. कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने इस मसले को सुलझाने के लिए केसी वेणुगोपाल को ही अहम जिम्मेदारी है. 

खबरों के मुताबिक मंत्री पद की संख्या को लेकर कांग्रेस के साथ हेमंत की बातचीत लगभग अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन विभागों को लेकर अंदर ही अंदर जिच बना है. कांग्रेस और राजद दोनों की नजरें भारी भरकम विभागों पर है. राजद सिंचाई या ग्रामीण विकास विभाग चाहता है, तो कांग्रेस की नजर खनन, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा विभाग पर है. जबकि हेमंत सोरेन बीच का रास्ता निकालना चाहते हैं. 

उधर कांग्रेस के सामने दिक्कत यह है कि दो वरिष्ठ नेता-आलमगीर आलम और रामेश्वर उरांव को उसने पहले ही मंत्री बना दिया है. बन्ना गुप्ता, इरफान अंसारी, बादल पत्रलेख, रामचंद्र सिंह चेरो सरीखे विधायक दूसरी कतार में लगे हैं. और इनमें से किसी एक को ही चुना जा सकता है. जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की भी चुनौती है. 

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कांग्रेस में इस बार चार महिलाएं चुनाव जीती हैं. हालांकि सभी पहली बार की विधायक हैं. इनमें से एक का मंत्री बनना तय है. दीपिका पांडेय का लॉबिंग मजबूत होता जान पड़ रहा है. कोलेबिरा से विक्सल कोंगाड़ी को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है. कोंगाड़ी आदिवासी सीट से दूसरी बार जीते हैं. 

जेएमएम में मुश्किलें 

जेएमएम से मंत्री कौन होगा, यह फैसला शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन को लेना है. लेकिन हेमंत के लिए मंत्री चुनना चुनाव लड़ने-लड़ाने से ज्यादा कठिन हो सकता है. इसलिए वे आखिरी वक्त तक पत्ते खोलना नहीं चाहते. 

जेएमएम में दर्जन भर दिग्गज चुनाव जीते हैं. साथ ही 30 सीटों पर चुनाव जीत कर जेएमएम सबसे बड़ा दल के रूप में उभरा है. हेमंत सोरेन दो सीटों पर चुनाव जीते हैं. बाकी 28 विधायक उनके दल से हैं. 

जाहिर है जेएमएम को 28 विधायकों के बीच से ही पांच या छह का नाम तय करना है. और यह काम कठिन भी है. इसलिए कि सिर्फ मंत्री चुनने की चुनौती नहीं है. समीकरण साधने और दिग्गजों को संतुष्ट करने और इंटैक्ट रखने की भी चुनौती है.

इससे पहले 29 दिसंबर को शपथ ग्रहण को लेकर तमाम अटकलों और कयासों के बाद भी जेएमएम से किसी को शामिल नहीं किया गया. वजहें हद तक साफ है. 

दर्जन भर दिग्गजों की नजर

जेएमएम में दर्जन भर दिग्गज चुनाव जीते हैं. और सबकी नजर मंत्री पद है. कुछ नए चेहरे भी उम्मीदें लगाए बैठे हैं. हेमंत भी चाहते हैं कि युवाओं को काम करने के मौके दिए जाएं. कई विधायक गुरुजी का आशीर्वाद पाने में लगे हैं. उन्हें पता है कि फैसले में गुरुजी की भी बात सुनी जाएगी. 

जेएमएम ने इल बार कोल्हान की 14 में से 11 सीटों पर चुनाव जीता है. कोल्हान से ही चंपई सोरेन, दीपक बिरूआ, जोबा माझी, दशरथ गागराई, निरल पूर्ति मंत्री बनने की आस में हैं. 

चंपई सोरेन सरायकेला से पांच बार चुनाव जीते हैं. हेमंत सोरेन की सरकार में पहले मंत्री रह चुके हैं. जोबा मांझी भी  पांच बार चुनाव जीत चुकी हैं. एकीकृत बिहार में और झारखंड की सरकार में मंत्री रही हैं. उनकी नजर भी मंत्री पद पर है. 

दीपक बिरूआ तीन बार चाईबासा से लगातार चुनाव जीते हैं. चाईबासा में बीजेपी की दीवार को हिलाने में उनकी दमदारी उभरी है. जानकार बताते हैं कि इस बार मंत्रिमंडल में सामिल होने के लिए दीपक ने नेतृत्व के सामने दावेदारी ठोक रखी है. 

इसी तरह मझगांव और खरसावां से फिर चुनाव जीते निरल पूर्ति और दशरथ गगराई की भी नजर मंत्रिमंडल पर है 

दशरथ गागराई ने 2014 में अर्जुन मुंडा को हराया था और इस बार भी बीजेपी को शिकस्त देमें सफल रहे हैं. 

उधर विशुनपुर से चमरा लिंडा भी तीन बार चुनाव जीत चुके हैं. तमाड़ से विकास मुंडा दूसरी बार चुनाव जीत कर आए हैं. विकास ने आजसू में दरक लगाई है. युवा भी हैं. आगे फैसला हेमंत सोरेन को लेना है. 

संताल परगना का पेंच 

उधर संताल परगना में स्टीफन मरांडी, नलिन सोरेन, हाजी हुसैन अंसारी और लोबिन हेंब्रम सरीखे दिग्गज चुनाव जीते हैं. इससे पहले ये चारों मंत्री भी रह चुके हैं. स्टीफन के स्पीकर नहीं बनने पर संकेत साफ हैं कि उन्हें मंत्री बनाया जाएगा. अनुभवों के साथ सरकार चलाने में हेमंत की मदद के लिए उन्हें जगह मिलना तय माना जा रहा है.  

नलिन सोरेन सात बार शिकारीपाड़ा से लगातार चुनाव जीतने वालों में शामिल हो गए हैं. इधर हाजी हुसैन अंसारी अब तक पांच चुनाव जीत चुके हैं. पहले मंत्री थे. जेएमएम में मुस्लिम नेता का बड़ा चेहरा हैं. उधर जामा में सीता सोरेन तीन बार चुनाव जीत चुकी हैं और वो भी दुर्गा सोरेन की राजनीतिक विरासत संभाल रही हैं. महिला कोटा से वे भी मंत्री बनने की प्रबल दावेदार हो सकती हैं.

कुर्मी का एडजस्टमेंट

इधर कोयलांचल में जगरनाथ महतो डुमरी से लगातार चार बार चुनाव जीते हैं. टुंडी में मथुरा महतो ने बीजेपी और आजसू को पछाड़ कर चुनाव जीतने में सफल रहे हैं. 

इससे पहले मथुरा महतो मंत्री रह चुके हैं और वे शिबू सोरेन के विश्वासी माने जाते हैं. जबकि नए चेहरे में इचागढ़ से सविता महतो चुनाव जीती हैं.

कुर्मी से किसी एक को मंत्री बनाया जाएगा, इसकी संभावना प्रबल है. तब तीन में से एक को चुनना भी बेहद कठिन होगा. उधर गढ़वा से मिथिलेश ठाकुर को भी मंत्री बनाए जाने को लेकर उनके कार्यकर्ता, समर्थक नजर लगाए बैठे हैं. 


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