बिलासपुर में फंसे 100 मजदूर लौट रहे झारखंड, हिम्मत बनीं एक सामाजिक कार्यकर्ता

बिलासपुर में फंसे 100 मजदूर लौट रहे झारखंड, हिम्मत बनीं एक सामाजिक कार्यकर्ता
पीबी ब्यूरो ,   Mar 24, 2020

कोरोना संकट के बीच छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रात भर फंसे रहे झारखंड के सौ से अधिक मजदूरों को वहां की सरकार ने आज वापस भेजने का इंतजाम किया है. 

सोमवार की रात उन्हें स्टेशन से लेकर बस पड़ाव तक भटकना पड़ा. लेकिन वापस लौटने का कोई साधन नहीं मिला. और इस दौरान उन्हें भोजन-पानी नसीब नहीं हुआ.

हालांकि एक युवा अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रियंका शुक्ला इन मजदूरों के लिए हिम्मत बनकर सामने आईं.

मजदूरों के खाने और लौटने के इंतजाम में वे लगातार पहल करती रहीं. प्रियंका बताती हैं कि अभी बिहार, बंगाल के दर्जनों मजदूर फंसे हैं. उन्हें भी वापस भेजने की पहल की जा रही है. 

सोमवार की रात यह जानकारी मिलने के बाद वे लगातार मजदूरों का हाल लेती रहीं और शासन प्रशासन के ध्यान में भी इस मामले को लाया.

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इस बीच छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार आलोक प्रकाश पुतुल ने भी आज सुबह कई ट्वीट कर दोनों राज्यों की सरकार का ध्यान खींचा. साथ ही उन्होंने हालात की जानकारी दी.

सामाजिक कार्यकर्ता प्रियंका शुक्ला बताती हैं कि सोमवार की रात चिंता बढ़ाने जैसी स्थिति थी. झारखंड और दूसरे राज्यों के युवा मजदूर हताश दिख रहे थे. लेकिन अब समाधान निकलता दिख रहा है. 

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कुछ देर पहले ही ट्वीट करके जानकारी दी है कि सभी मजदूरों की जांच कराकर वापस भेजने का इंतजाम किया गया है.  

इससे पहले झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छत्तीसगढ़ से मदद की दरकार बताई थी. अब हेमंत सोरेन ने मदद के लिए छत्तीसगढ़ सरकार का आभार जताया है. 

इससे पहले भूपेश बघेल ने ट्वीट कर झारखंड सरकार को चिंता नहीं करने को कहा. उन्होंने बताया है कि मजदूरों के भोजन आदि का इंतजाम किया गया है. अधिकारी झारखंड की सीमा तक पहुंचाने का इंतजाम कर रहे हैं. 

 

 

झारखंड में गढ़वा जिले के रमना प्रखंड के हाराजाद गांव के रहने वाले संजय चौधरी ने बताया है कि सोमवार की रात 23 लोग नागपुर से बिलासपुर पहुंचे थे.

संजय चौधरी का कहना था कि नागपुर की एक सड़क निर्माण कंपनी में वेलोग काम करते हैं. रात में बिलासपुर स्टेशन पहुंचे, लेकिन झारखंड जाने का कोई साधन नहीं मिला. 

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इस बीच स्टेशन के कर्मचारियों ने उन्हें वहां से हटने को कहा. इसके बाद तिफरा स्थित बस पड़ाव पहुंचे, जहां बसें नहीं थीं. देर रात तक वहीं पड़े रहे.

फिर पुलिस वालों ने बस स्टैंड से हट जाने को कहा. भोजन- पानी का भी संकट पैदा हो गया. जेहन में कई सवाल अलग ही मन को डराते रहे. फोन पर घर-परिवार के लोगों से बातें होती रही. समझिए जैसे- तैसे नागपुर से यहां तक पहुंचे और फिर रतजगा करते रहे. 

संजय बताते हैं कि फिलहाल स्टेशन पर ही हैं. अभी तुरंत प्रियंका की पहल पर नाश्ते का इंतजाम किया गया है. यकीनन संकट की इस घड़ी में प्रियंका हिम्मत बनकर सामने आई हैं. हम सभी उम्मीद कर रहे हैं कि आज सकुशल घरों को लौट जाएंगे. वेलोग हर जांच से भी गुजरना चाहते हैं, ताकि घर- गांव को परेशानी नहीं हो. 

संजय बताते हैं कि अभी तुरंत ये खबर मिली है कि बिलासपुर प्रशासन बस का इंतजाम कर रहा है. बताया गया है कि झारखंड बॉर्डर तक पहुंचा दिया जाएगा. इसके बाद झारखंड से मदद मिलेगी. 

संजय चौधरी ने बताया कि पलामू के अलावा झारखंड के दूसरे जिलों से भी कई युवा मजदूर बिलासपुर में फंसे पड़े हैं. कई लोग चेन्नई समेत देश के दूसरे हिस्सों में दिहाड़ी खटने आए थे. उनका दावा है कि सौ से कम लोग नहीं होंगे. 

वे बताते हैं कि अधिकतर जगहों पर कोरोना संकट के मद्देनजर बंद के हालात हैं. काम रोक दिए गए हैं. लिहाजा सभी लोग अपने गांव लौटना चाहते हैं. 

Twitter @bhupeshbaghel

चिंता बढ़ती जा रही

इस बीच छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार आलोक प्रकाश पुतुल ने एक ट्वीट कर झारखंड सरकार का ध्यान खींचा है. साथ ही नवभारत अखबार में छपी एक खबर भी साझा किया है.

उन्होंने कहा है, ''महाराष्ट्र से लौटते हुए झारखंड के 50 से अधिक मजदूर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में फंसे हुए हैं. आने-जाने की कोई सुविधा नहीं है. खाना तक इन्हें नसीब नहीं हुआ है.''  

आलोक पुतुल बताते हैं कि बिलासपुर प्रशासन से पहल की गई है. उम्मीद की जानी चाहिए कि झारखंड के मजदूर आज लौट सकेंगे. उनका कहना है कि सामाजिक कार्यकर्ता प्रियंका उन मजदूरों के लगातार संपर्क में हैं. 

सामाजिक कार्यकर्ता प्रियंका बताती हैं कि झारखंड के अलावा बंगाल और बिहार के भी दर्जनों मजदूर फंसे हैं. कई लोग परिवार और बच्चे के साथ हैं. महिलाओं की आंखों में खौफ का साया साफ देखा जा सकता है. 

सुकून की बात है कि आज सुबह से शासन- प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लिया है. सोमवार  की रात चिंता वाली थी. जब उन्हें स्टेशन से हटा दिया गया. फिर बस पड़ाव से. खौफ इतना है कि कोई किसी के नजदीक आना नहीं चाहता.

वे बताती हैं कि सोमवार की रात मजदूरों के चेहरे पर खौफ का साया साफ देखा जा सकता था. लेकिन अब सामान्य होता दिख रहा है. 

प्रियंका बताती हैं कि बंगाल और बिहार के फंसे मजदूरों की मदद के लिए भी सरकार से अनुरोध किया गया है. जिस तरह की हलचल है उससे लगता है  कि सरकार ने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है. 

 


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